New direction with the coordination of MMME, Science and Technology, DRDO committed to industries | MSME, साइंस व टेक्नोलॉजी के समन्वय से ही नई दिशा, DRDO उद्योगों के लिए प्रतिबद्ध

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इंदौर2 घंटे पहले

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वर्कशॉप को संबोधित करते मंत्री सकलेचा। - Dainik Bhaskar

वर्कशॉप को संबोधित करते मंत्री सकलेचा।

MSME, साइंस और टेक्नोलॉजी का जब समन्वय होता है, तो कुछ नया प्रॉडक्शन होता है। ऐसे में डीआरडीओ (Defence Research and Development Organisaiton) के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्‌डी का मप्र के उद्योगों के साथ में होना गौरव की बात है। बड़ी चुनौती है कि हम इम्पोर्ट के बजाय ज्यादा से ज्यादा एक्पपोर्ट करें। इसके लिए डीआरडीओ की टेक्नोलॉजी का उपयोग कैसे करें, यह जानना होगा। टेक्नोलॉजी, एंटरप्रिन्योरशिप व फाइनेंस, अगर यह त्रिमूर्ति तैयार हो गई तो हमारा सपना है कि मप्र में एक भी बेरोजगार नहीं होगा। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की अपेक्षा एमएसएमई से ही है।

यह बात प्रदेश के एमएसएमआई मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा ने शुक्रवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘बिजनेस अपार्च्युनिटी इन डिफेंस सेक्टर’ की वर्कशॉप में कही। उन्होंने कहा कि पहले पॉवर की शॉर्टेज थी, लेकिन अब इसके सहित समस्याएं हल हो गई हैं। पहले क्लस्टर बनाने या इण्डस्ट्रियल एरिया बनाने के लिए तीन-चार साल लग जाते हैं। चार साल में वह डेवलेप होगा, तब तक फिर आधी से ज्यादा टेक्नोलॉजी बदल जाती हैं। बाजार की जरूरत में अंतर आ जाता है। इसके चलते अब बदलाव किया गया है।

अगर 8-10 उद्यमी साथ में मिलकर कुछ उद्योग स्थापित करना चाहते हैं, तो उन्हें सरकार इकोनॉमिक कॉस्ट में क्लस्टर बनाकर देना चाहती है। अब उद्यमियों के लिए जरूरी है कि रुपया जमीन में नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी व इक्विपमेंट में लगाएं।

डीआरडीओ को कौन सी टेक्नोलॉजी पर ध्यान दें

सकलेचा ने कहा कि उद्यमियों को इस पर ध्यान देना होगा कि डीआरडीओ को कौन सी टेक्नॉलॉजी मार्केट को सपोर्ट देगी। एविएशन सहित कई सेक्टर हैं जहां टेक्नोलॉजी के मामले में उद्योगों में कुछ किया जा सकता है। मप्र में उद्योगों का तेजी से विकास हुआ है। हाल में अप्रैल में सबसे ज्यादा 1892 क्लस्टर के लिए भूमिपूजन किया गया था, जिन्हें अब अच्छी गति मिल गई है। उद्यमियों को चाहिए कि वे डीआरडीओ से समन्वय करें ताकि उद्योगों को एक नई दिशा मिले।

मप्र के उद्योगों को गति देगा डीआरडीओ

डीआरडीओ के सेक्रेटरी डॉ. जी. सतीश रेड्‌डी ने डीआरडीओ द्वारा डेवलप टेक्नोलॉजी पर आधारित प्रोडक्ट्स व नए उद्योगों के अवसर के लिए एमएसएमई इकाइयों के सहयोग एवं टेक्नोलॉजी रैफर पर अपनी बात कही। उन्होंने उद्यमियों को विश्वास दिलाया कि वे डीआरडीओ की टेक्नोलॉजी का लाभ लेकर डिफेंस को प्रॉडक्ट्स बेच सकते हैं।

डॉ. रेड्‌डी ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा मप्र में इण्डस्ट्रीज को डेवलप करना है। उन्होंने वर्कशॉप में 600 से ज्यादा उद्यमियों की उपस्थिति देख खुशी जाहिर की और कहा कि पहली बार किसी शहर में डिफेंस की टेक्नोलॉजी से उद्योगों को नए आयाम देने के लिए इतने उद्ममी एकत्रित हुए हैं। ऐसे मामलों को प्रधानमंत्री से अवगत कराया जाएगा।

डीआरडीओ की देशभर में लैब्स

उन्होंने कहा कि डीआरडीओ केवल रिसर्च एण्ड डेवलप कर डिफेंस को देती है। डीआरडीओ की तमिलनाडु, केरल, हैदराबाद, बेंगलुरु, महाराष्ट्र, जोधपुर, उप्र, उत्तारखण्ड, असम व मप्र के ग्वालियर में लैब्स हैं। यहां डिवाइस, इलेक्ट्रिक, राडार, आर्म्ड व्हीकल, पैराशूट, एयर क्रॉफ्ट्स आदि पर रिसर्च व डेवलपमेंट होता है। ग्वालियर की लैब में 2 डीडीजीएस मेडिसिन बनने लगी है।

नए-नए ये आयाम

– डॉ. रेड्‌डी ने कहा रिसर्च एंड डेवलपमेंट के तहत आर्मी को मजबूत करने के लिए जनवरी 2021 में अर्जुन टैंक बनाया था। मामले में फिर प्रधानमंत्री ने इसके प्रॉडक्शन के लिए ऑर्डर दिए थे।

– डिफेंस से जुड़े 209 ऐसे प्रॉडक्ट्स हैं, जो अभी बनाए जाने हैं। इसके लिए डीआरडीओ ने अपनी 1300 टेक्नोलॉजी इण्डस्टीज को ट्रांसफर की है।

– ऐसे ही 1700 पेटेंट भारतीय उद्योगों के लिए वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

– भारत में इम्पोर्ट कम से कम हो, इंडिया खुद इसे बनाएं।

– उन्होंने कहा कि युवाओं के स्किल डेवलपमेंट के लिए देश में इस साल 40 यूनिवर्सिटीज में M.Tech. In Defence इस साल से शुरू किया जा रहा है। इसके लिए डीआरडीओ इंटर्नशिप देगी।

– अभी साइबर सिक्युरिटी व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं। इसके पूर्व वर्कशॉप को सेक्रेटरी व इण्डस्ट्रीज सचिव पी. नरहरि व सांसद शंकर लालवानी ने संबोधित किया।

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