Indore Ujjwal Shukla Column Politics become red from Nimadi red chilli

Publish Date: | Sat, 09 Oct 2021 09:59 AM (IST)

Indore Ujjwal Shukla Column: उज्जवल शुक्ला, इंदौर, नईदुनिया। लाल मिर्च के लिए देशभर में पहचाने जाने वाले निमाड़ क्षेत्र की राजनीति इन दिनों मिर्ची सी ‘लाल’ हो रही है। खंडवा उपचुनाव में दावेदारी से उम्मीदवारी तक के सफर में दोनों दलों के दर्जनों नेताओं को निमाड़ की तीखी मिर्च बार-बार ‘लगती’ रही है। मिर्ची की चर्चा यहीं तक सीमिति नहीं रही। अब खरगोन जिला प्रशासन ने लाल मिर्च को मतदाता जागरूकता अभियान का शुभंकर बना लिया है। अब निमाड़ी मिर्ची एक बार फिर चर्चा में है। उम्मीदवार घोषित होने के बाद जिन्हें मौका नहीं मिला उन्हें तो मिर्ची लगी ही उनके क्षत्रपों को भी निमाड़ी मिर्ची ने अपने ‘तीखेपन’ का अहसास करवा दिया। हलांकि मिर्च के मारों में कांग्रेस से ज्यादा भाजपाइयों की संख्या है। मिर्च लगने के बाद हो रही छटपटाहट का सबसे ज्यादा आनंद क्षेत्र के कार्यकर्ता उठा रहे हैं। चेहरे लाल देखकर वे अपनी सूची में एक और मिर्च के मारे का नाम जोड़ लेते हैं।

भाजपा-कांग्रेस से ज्यादा खंडवा-बुरहानपुर की चर्चा

‘निमाड़ की नैया, नंदू भैया’ के नारे से गूंजने वाले खंडवा लोकसभा क्षेत्र में इस बार अलग ही रंग देखने को मिल रहे हैं। नंदकुमार सिंह चौहान (नंदू भैया) के निधन से खाली हुई खंडवा लोकसभा सीट के उपचुनाव में इस बार ‘वोकल फार लोकल’ का शोर ज्यादा सुनाई दे रहा है। उपचुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस ने अपने योद्धा मैदान में उतार दिए हैं। योद्धाओं के नाम सामने आने के बाद चुनाव कांग्रेस-भाजपा के बजाय खंडवा-बुरहानपुर की ओर मुड़ गया। इसकी वजह भाजपा द्वारा लगातार 12 चुनावों से बुरहानपुर जिले के निवासी को उम्मीदवार बनाना है। हालांकि नंदू भैया के चुनाव मैदान में उतरने पर कभी भी क्षेत्रवाद हावी नहीं रहा। इस बार खंडवा के लोगों को उम्मीद थी कि किसी स्थानीय उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाएगा। ज्ञानेश्वर पाटिल के नाम के साथ ये उम्मीद खत्म हो गई और ‘वोकल फार लोकल’ का मुद्दा चर्चा में आ गया।

‘पटवारी’ ने किया कांग्रेस और भाजपा को परेशान

आलीराजपुर जिले की जोबट में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। यहां ‘पटवारी’ ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की जमीन हिलाकर रख दी है। यहां बात कांग्रेस नेता जीतू पटवारी की नहीं, बल्कि जोबट तहसील के एक पटवारी की लोकप्रियता की हो रही है। आदिवासी समाज से आने वाले नीतेश अलावा जोबट में पटवारी हैं। पिछले दिनों जयस के बैनर पर नेमावर, मानपुर व कसरावद में हुए प्रदर्शन में नीतेश शामिल हुए थे। इससे नाराज होकर आलीराजपुर कलेक्टर ने नीतेश को निलंबित कर दिया। उनके निलंबन के खिलाफ आदिवासियों ने एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। नीतेश की पत्नी भी पटवारी हैं और उनके साले भाजपा नेता हैं। जोबट चुनाव में जयस ने नीतेश की लोकप्रियता को भुनाने का फैसला किया है। नीतेश की आदिवासी समाज में लोकप्रियता से भाजपा-कांग्रेस दोनों परेशान हैं।

चुनावी बिसात में पत्रकारों से पिछड़े नेताजी

शहर में भाजपा के पुराने चेहरों में गोविंद मालू भी शामिल हैं, मगर चुनावी बिसात से दूर ही रहे हैं। पिछले दिनों उनके नाम की चर्चा खेल पत्रकारों की संस्था के प्रमुख पद के लिए चली। इंदौर स्पोटर्स राइटर्स एसोसिएशन (इस्पोरा) की सत्ता पाने के लिए कुछ पूर्व पत्रकारों ने मालू का चेहरा आगे किया। इसके बाद संस्था सदस्यों के फोन घनघनाने लगे और हस्ताक्षर कराने के लिए घर-घर लोग भी पहुंचने लगे। खेल पत्रकारिता में मालू ने कितनी कलम चलाई यह खोज का विषय हो सकता है। खैर, खेल पत्रकारों के दूसरे गुट को इस कवायद की सूचना मिलते ही उसके सदस्य भी सक्रिय हो गए। इस गुट की कमान संभालने वाले ओम सोनी खेल संस्थाओं की राजनीति में पुराने रमे हैं। सोनी गुट ने इस्पोरा के चुनाव करा दिए। खासबात यह रही कि मालू गुट के साथ नजर आने वाले कई चेहरे यहां सोनी गुट के साथ खड़े थे।

Posted By: Prashant Pandey

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