Ias Iftikharuddin Religion Conversion Case Investigation Started By Sit Kanpur – धर्मांतरण का मामला: वरिष्ठ आईएएस मो. इफ्तिखारुद्दीन की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, एसआईटी की जांच शुरू

माई सिटी रिपोर्टर, कानपुर
Published by: Vikas Kumar
Updated Wed, 29 Sep 2021 10:36 PM IST

सार

एसआईटी ने तीनों वीडियो को देखा। मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन और उनका एक शागिर्द वीडियो में जो बातें कहते सुनाई दे रहा है उन सभी बातों को नोट किया है। जिससे पता चल सकेगा कि आखिर लोगों को तकरीर कर क्या-क्या बोला जा रहा था। धर्मांतरण संबंधी क्या तथ्य हैं आदि।

मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन,आईएएस अधिकारी
– फोटो : अमर उजाला

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वरिष्ठ आईएएस मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन के वायरल वीडियो के मामले की जांच करने के लिए बुधवार शाम एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) शहर पहुंची। एसआईटी के अध्यक्ष सीबीसीआईडी के डीजी और एडीजी जोन कानपुर ने पहले सर्किट हाउस में बैठक की और फिर मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचकर तकरीर स्थल देखा। कमिश्नरी के अफसरों के साथ बैठक कर मामले से संबंधित जानकारी साझा की। वहीं वायरल वीडियो जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिए गए हैं। अगले एक दो दिन टीम शहर में ही रहेगी। 

मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन कानपुर के मंडलायुक्त रहे हैं। उनका कार्यकाल 17 फरवरी 2014 से 22 अप्रैल 2017 तक रहा। इस दौरान के उनके तीन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। जिसमें वह सरकारी आवास पर तकरीर करते, धर्मांतरण संबंधी एक शख्स भाषण देते और इस्लाम धर्म के फायदे गिनवाते सुनाई दे रहे हैं। शासन ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। एसआईटी के अध्यक्ष सीबीसीआईडी के डीजी जीएल मीणा बुधवार शाम करीब चार बजे सर्किट हाउस पहुंचे। वहीं एसआईटी के सदस्य जो वर्तमान में मैनपुरी में एक केस की तफ्तीश कर रहे थे एडीजी भानु भास्कर भी उसी दौरान वहां पहुंचे। उनके साथ एडिशनल सीपी आनंद प्रकाश तिवारी भी मौजूद रहे। अफसरों ने बैठक की और फिर यहां से वह मंडलायुक्त आवास पर पहुंचे। यहां पर उस स्थान को देखा जहां पर तकरीरें की गई थीं। बाद में दोनों अफसर मंथन करते रहे। 

फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए वीडियो 
एसआईटी ने तीनों वीडियो को देखा। मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन और उनका एक शागिर्द वीडियो में जो बातें कहते सुनाई दे रहा है उन सभी बातों को नोट किया है। जिससे पता चल सकेगा कि आखिर लोगों को तकरीर कर क्या-क्या बोला जा रहा था। धर्मांतरण संबंधी क्या तथ्य हैं आदि। उसके बाद इन वीडियो को फोरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा गया है। जिससे इसकी पुष्टि होगी कि वीडियो सही है या नहीं। एडिटिंग की गई है या नहीं। उसमें दिखने वाला शख्स मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन हैं या नहीं, आदि की पुष्टि जांच में ही होगी। 

दो दर्जन से अधिक लोगों की बनी सूची 
सूत्रों से पता चला है कि शुरुआती जांच के दौरान एसआईटी ने दो दर्जन लोगों की सूची तैयार की है। जिनसे एसआईटी पूछताछ करेगी। इसमें कमिश्नर आवास और कार्यालय में तैनात कर्मचारी, उनके करीबी, ड्राइवर आदि के नाम शामिल हैं। इसके अलावा सीटीएस बस्ती के जिन लोगों ने धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया है उनके भी बयान दर्ज होंगे। मामले के शिकायतकर्ता भूपेश अवस्थी के भी बयान दर्ज किए जाएंगे। 

एसआईटी में अफसरों की संख्या बढ़ी
शासन ने डीजी और एडीजी को अध्यक्ष व सदस्य बनाया है। वहीं अब इसमें सीबीसीआईडी के एक एडिशनल एसपी, एक इंस्पेक्टर, दो सब इंस्पेक्टर और तीन सिपाहियों को शामिल किया है। ये सभी मिलकर जांच करेंगे। 

मामले की तफ्तीश शुरू की गई है। मुख्य रूप से वायरल वीडियो की जांच की जाएगी। आगे जो तथ्य सामने आते जाएंगे उनको जांच में शामिल किया जाएगा। तय समय में जांच पूरी कर शासन को सौंपी जाएगी। – जीएल मीणा, अध्यक्ष एसआईटी (सीबीसीआईडी डीजी)

विस्तार

वरिष्ठ आईएएस मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन के वायरल वीडियो के मामले की जांच करने के लिए बुधवार शाम एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) शहर पहुंची। एसआईटी के अध्यक्ष सीबीसीआईडी के डीजी और एडीजी जोन कानपुर ने पहले सर्किट हाउस में बैठक की और फिर मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचकर तकरीर स्थल देखा। कमिश्नरी के अफसरों के साथ बैठक कर मामले से संबंधित जानकारी साझा की। वहीं वायरल वीडियो जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिए गए हैं। अगले एक दो दिन टीम शहर में ही रहेगी। 

मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन कानपुर के मंडलायुक्त रहे हैं। उनका कार्यकाल 17 फरवरी 2014 से 22 अप्रैल 2017 तक रहा। इस दौरान के उनके तीन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। जिसमें वह सरकारी आवास पर तकरीर करते, धर्मांतरण संबंधी एक शख्स भाषण देते और इस्लाम धर्म के फायदे गिनवाते सुनाई दे रहे हैं। शासन ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। एसआईटी के अध्यक्ष सीबीसीआईडी के डीजी जीएल मीणा बुधवार शाम करीब चार बजे सर्किट हाउस पहुंचे। वहीं एसआईटी के सदस्य जो वर्तमान में मैनपुरी में एक केस की तफ्तीश कर रहे थे एडीजी भानु भास्कर भी उसी दौरान वहां पहुंचे। उनके साथ एडिशनल सीपी आनंद प्रकाश तिवारी भी मौजूद रहे। अफसरों ने बैठक की और फिर यहां से वह मंडलायुक्त आवास पर पहुंचे। यहां पर उस स्थान को देखा जहां पर तकरीरें की गई थीं। बाद में दोनों अफसर मंथन करते रहे। 

फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए वीडियो 

एसआईटी ने तीनों वीडियो को देखा। मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन और उनका एक शागिर्द वीडियो में जो बातें कहते सुनाई दे रहा है उन सभी बातों को नोट किया है। जिससे पता चल सकेगा कि आखिर लोगों को तकरीर कर क्या-क्या बोला जा रहा था। धर्मांतरण संबंधी क्या तथ्य हैं आदि। उसके बाद इन वीडियो को फोरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा गया है। जिससे इसकी पुष्टि होगी कि वीडियो सही है या नहीं। एडिटिंग की गई है या नहीं। उसमें दिखने वाला शख्स मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन हैं या नहीं, आदि की पुष्टि जांच में ही होगी। 

दो दर्जन से अधिक लोगों की बनी सूची 

सूत्रों से पता चला है कि शुरुआती जांच के दौरान एसआईटी ने दो दर्जन लोगों की सूची तैयार की है। जिनसे एसआईटी पूछताछ करेगी। इसमें कमिश्नर आवास और कार्यालय में तैनात कर्मचारी, उनके करीबी, ड्राइवर आदि के नाम शामिल हैं। इसके अलावा सीटीएस बस्ती के जिन लोगों ने धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया है उनके भी बयान दर्ज होंगे। मामले के शिकायतकर्ता भूपेश अवस्थी के भी बयान दर्ज किए जाएंगे। 

एसआईटी में अफसरों की संख्या बढ़ी

शासन ने डीजी और एडीजी को अध्यक्ष व सदस्य बनाया है। वहीं अब इसमें सीबीसीआईडी के एक एडिशनल एसपी, एक इंस्पेक्टर, दो सब इंस्पेक्टर और तीन सिपाहियों को शामिल किया है। ये सभी मिलकर जांच करेंगे। 

मामले की तफ्तीश शुरू की गई है। मुख्य रूप से वायरल वीडियो की जांच की जाएगी। आगे जो तथ्य सामने आते जाएंगे उनको जांच में शामिल किया जाएगा। तय समय में जांच पूरी कर शासन को सौंपी जाएगी। – जीएल मीणा, अध्यक्ष एसआईटी (सीबीसीआईडी डीजी)