Explained What is vehicle Scrappage policy and How its works know all facts here

नई दिल्ली, ऑटो डेस्क।  Explained Vehicle Scrappage Policy: इस साल की शुरुआत में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में बहुप्रतीक्षित Vehicle Scrappage Policy की घोषणा की थी। जिसे भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक उपाय के रूप में जाना जा रहा है, मानना है, कि इस पॉलिसी के जरिए ना सिर्फ प्रदूषण को कम करने बल्कि सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। अपने इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं, कि क्या है Vehicle Scrappage Policy और कैसे आपके वाहनों पर से लागू किया जाएगा।

क्या है Vehicle Scrappage Policy?

इस नई नीति के तहत 15 साल से पुराने सरकारी और कमर्शियल वाहनों और 20 साल से पुराने निजी वाहनों को नष्ट कर दिया जाएगा। इसके तहत पुराने वाहनों को पुन: पंजीकरण से पहले एक फिटनेस टेस्ट पास करना होगा और नीति के अनुसार, 15 वर्ष से अधिक पुराने सरकारी कमर्शियल वाहन और 20 वर्ष से अधिक पुराने निजी वाहनों को रद्द कर दिया जाएगा।

हम जानते हैं, कि पुरानी डीजल और पेट्रोल कारों की बात सालों से चल रही है। सबसे पहले 29 अक्टूबर 2018 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों के चलने पर रोक लगा दी थी।

दिल्ली की सड़कों से पुरानी कारों को हटाने के इस नए अभियान के पहले चरण के तहत परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमें पहले 15 साल से अधिक उम्र के डीजल वाहनों को जब्त करने के साथ शुरू करेंगी। ऐसी कारों का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा और उन्हें स्क्रैपिंग के लिए रवाना कर दिया जाएगा।

हालांकि इससे पहले ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर में पुराने वाहनों का परीक्षण किया जाएगा और वाहनों का फिटनेस परीक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जाएगा। इसमें एमिशन टेस्ट, ब्रेकिंग सिस्टम, सेफ्टी कंपोनेंट्स की जांच की जाएगी और फिटनेस टेस्ट में फेल होने वाले वाहनों को रद्द कर दिया जाएगा। फिटनेस टेस्ट और स्क्रैपिंग सेंटर बनाने के नियम 1 अक्टूबर, 2021 से लागू होंगे, जबकि 15 साल पुरानी सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों के वाहनों की स्क्रैपिंग 1 अप्रैल, 2022 से और भारी वाहनों की 1 अप्रैल 2023 से शुरू की जाएगी।

क्यों लागू की गई Scrappage Policy

नई स्क्रैपेज नीति के अपने मायने हैं, क्योंकि पुराने वाहन फिटेड वाहनों की तुलना में 10 से 12 गुना अधिक प्रदूषण फैलाते हैं, और सड़क सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं। वर्तमान में, भारत में लगभग 51 लाख हल्के मोटर वाहन हैं जो 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं और 34 लाख वाहन हैं जो 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इसके साथ ही सड़कों पर लगभग 17 लाख मध्यम और भारी कमर्शियत वाहन हैं जो 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं और आवश्यक ‘फिटनेस प्रमाणपत्र’ के बिना चल रहे हैं।