Covid Vaccination Campaign Made A Record : Mansukh Mandaviya – कोविड टीकाकरण अभियान ने बनाया रेकॉर्ड : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया

स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधारों का हुआ सकारात्मक असर ।

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए पिछले साल के बजट की तुलना में 137 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मनसुख मांडविया, (केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री)

एक स्वस्थ राष्ट्र से देश की उत्पादकता में वृद्धि होती है तथा सामाजिक-आर्थिक स्तर पर बेहतर परिणामों के लिए व्यापक प्रभाव पैदा होता है। केंद्र सरकार ने इस बात को समझा और 2021-22 के बजट में स्वास्थ्य के लिए 2.23 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए पिछले साल के बजट की तुलना में 137 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने और भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि होती है।

कोविड टीकाकरण अभियान भी इसका उदाहरण है। स्वास्थ्यकर्मी, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय के प्रतिबद्ध अधिकारियों की टीमों, निजी क्षेत्र और सहयोगी संगठनों के प्रयासों के कारण ही ये उपलब्धियां हासिल हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 की शुरुआत में ही टीकाकरण कार्यक्रम पर ध्यान देेकर प्रत्येक भारतीय को इस महामारी के खतरों से बचाने पर बहुत जोर दिया था। 2014 के बाद से ही, देशवासियों के स्वास्थ्य को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा गया है। तदनुसार, दिसंबर 2014 में महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत की, जिसके परिणामस्वरूप भारत में 90 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण संभव हुआ। स्वास्थ्य संबंधी सार्वभौमिक कवरेज के प्रति वचनबद्धता के साथ एक व्यापक सुधार एजेंडा के तौर पर 2017 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (एनएचपी) की घोषणा की गई।

वंचितों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री से नियमित रूप से निर्देशित आयुष्मान भारत कार्यक्रम भी शुरू किया गया। आयुष्मान भारत का दूसरा स्तंभ, यानी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाइ) की शुरुआत भी 2018 में हुई थी। पीएम-जेएवाइ के तहत वंचितों को अब तक 16 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड, अस्पताल में दो करोड़ दाखिले और 26,000 करोड़ रुपए मूल्य के इलाज से जुड़ी सुविधाएं प्रदान की गई हैं। सरकार का यह दृढ़ विश्वास है कि स्वस्थ माताएं और बच्चे किसी भी समाज की आधारशिला होते हैं। पिछले पांच वर्षों में विभिन्न योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन की वजह से भारत की मातृ और शिशु मृत्यु दर में विश्व स्तर पर इस क्षेत्र में होने वाली गिरावट की दर की तुलना में बहुत तेज गति से गिरावट जारी है।

भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) की जगह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) का गठन करने संबंधी कदम से भारत में एक व्यावहारिक और भरोसेमंद चिकित्सा शिक्षा प्रणाली तैयार होगी। इसके अलावा, हाल ही में संसद द्वारा पारित ‘राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य देख-रेख वृत्ति आयोग विधेयक, 2020’ संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े पेशेवरों द्वारा प्रदान की जाने वाली शिक्षा और सेवाओं के मानकों के विनियमन और रख-रखाव की बहुप्रतीक्षित जरूरत को पूरा करेगा। डेंटल आयोग विधेयक, नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग विधेयक जैसे कई अन्य विधेयकों को मंजूरी मिलने के बाद भारत में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में और अधिक बदलाव आएगा।

चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में हर साल दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक-से-अधिक बढ़ाने की दिशा में कई सुधार लागू किए गए हैं। वर्ष 2014 से लेकर वर्ष 2020 तक की अवधि में देश भर में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 48 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एमबीबीएस सीटों की संख्या में 57 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसी तरह मेडिकल पीजी सीटों की संख्या में भी लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।