climate change insights of india: GK Update: जानें क्या हैं भारत के जलवायु परिवर्तन के कारण व विशेषताएं – know what are the causes and features of india’s climate change

हाइलाइट्स

  • किसी देश की दशा और दिशा वहां के जलवायु पर निर्भर करती है
  • जानें पश्चिमी से पूर्वी भाग में बारिश के कम हो जाने का कारण
  • ये हैं भारत में जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक व विशेषताएं

Climate Change Insights Of India: किसी देश की दशा और दिशा वहां के जलवायु पर निर्भर करती है। अगर जलवायु अनुकूल है तो वह देश विकास की सीढि़यां चढ़ता जाता है। भारत की जलवायु विविधतापूर्ण है। यहां एक स्थान से दूसरे स्थान में तथा एक ऋतु से दूसरी ऋतु में तापमान व वर्षा की मात्रा में काफी अंतर है। अत्यधिक प्रादेशिक भिन्नता भारत की जलवायु की विशेषता है क्योंकि ऐसी जलवायु विश्व में कहीं नहीं मिलती।

इसको हम इस तरह समझ सकते हैं, जैसे असम में भारी वर्षा होती है, क्‍योंकि वहां की जलवायु आर्द्र है। वहीं राजस्थान में कम वर्षा होने का कारण यहां की जलवायु शुष्क होना है। पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलों में जहां ग्रीष्मकाल में दिन का तापमान 50° सेल्सियस तक पहुंच जाता है वहीं शीत ऋतु में जम्मू-कश्मीर में स्थित द्रास एवं कारगिल में तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है। इसी तरह जहां मेघालय के मॉसिनराम व चेरापूंजी एवं असम में 900 से 1000 सेमी. तक वर्षा होती है, वहीं उसी अवधि में राजस्थान के जैसलमेर आदि क्षेत्रों में सिर्फ 10 से 12 सेमी. ही वर्षा होती है।

भारत में जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक व विशेषताएं (Factors and features affecting climate in India)

अक्षांश
भारत के मध्‍य से होकर कर्क रेखा गुजरती है, जिसके कारण क्षेत्र का तापमान सापेक्षतया अधिक रहता है। मैदानी क्षेत्र भी 32°उ. अक्षांशों के अंतर्गत ही स्थित है।

मानसूनी हवाएं
भारत में मानसूनी हवाएं ग्रीष्मकाल के दौरान दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती हैं व शीत काल में इनके बहने की दिशा उत्तर-पूर्व हो जाती है। ये मानसूनी हवाएं वर्षा की मात्रा, आर्द्रता व तापमान को प्रभावित करती हैं।
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समुद्र से निकटता
समुद्र के समीप पड़ने वाले क्षेत्रों में जलवायु प्रायः एक समान ही होती है। इसीलिए भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग के प्रदेशों के तापमान में विभिन्नताएं द्रष्टव्य होती हैं।

मिट्टी की प्रकृति
देश में मौजूद विभिन्न प्रकार की मिट्टियां तापमान को भिन्न-भिन्न दरों से अवशोषित करती हैं। राजस्थान की रेतीली मिट्टी की बजाय निम्न गंगा बेसिन क्षेत्र की कांप मिट्टी तापमान को अधिक तीव्रता से अवशोषित कर सकती है।

हिमालय का प्रभाव
हिमालय भारत और मध्य एशिया के बीच जलवायु को बांटने का काम करता है। हिमालय ठंडी मौसम में पश्चिमी एशिया में से आने वाले ठंडी और शुष्क हवाओं को भारत में आने से रोकता है। मानसून के महीने में यह दक्षिणी पूर्वी मानसूनी हवाओं को रोक के रखता है जिससे ठीक से बारिश होती है। अगर हिमालय न होता तो भारत आज मरुस्थल होता और मानसूनी हवा चीन की तरफ चली जाती।
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उष्णकटिबंधीय चक्रवात एवं पश्चिमी विभोक्ष
भारत में उष्णकटिबंधीय विभोक्ष जलवायु परिवर्तन में बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर में उत्पन्न होते हैं और भारतीय उपमहाद्वीप के कई महत्वपूर्ण भागों को प्रभावित करते हैं। इनमे से ज्यादातर चक्रवात बंगाल की खाड़ी में पैदा होते हैं और दक्षिणी पश्चिमी मानसून के जलवायु को प्रभावित करते हैं।

अक्टूबर और नवंबर के महीने में मानसून खत्म होने के बाद इस महीने के दौरान देश में बहुत से चक्रवात आते हैं जो पूर्वी तटीय इलाकों को प्रभावित करते हैं। यह मेडिटेरेनियन समुद्र में पश्चिमी दबाव बनता है और चक्रवात पूर्व की तरफ मुड़ जाते हैं। यह उत्तरी मैदान और पश्चिमी हिमालय भाग के तापमान को प्रभावित करते हैं

पश्चिमी से पूर्वी भाग में बारिश के कम हो जाने का कारण
देश के अंदर गर्मी के समय उत्तरी मैदान में कई जगह कम दबाव वाले बिंदु मौजूद होते हैं। जैसे ही मानसूनी हवा पूर्वी से पश्चिमी छोर की ओर जाता है तो इन दबाव बिंदुओं पर तेज बारिश होने के कारण कम दबाव वाले क्षेत्रों में भारी बारिश हो रही होती है। जब तक हवा पश्चिमी छोर तक पहुंचती है तब तक मानसून के हवाओं की नमी खत्म हो चुकी होती हैं।

जिसके कारण हरियाणा और पंजाब प्रदेशों में सर्दी के मौसम में पश्चिमी दबाव से बारिश होती है। वहीं गुजरात एवं राजस्थान में मानसून के हवा को रोकने के लिए कोई पर्वतीय घेराव नहीं है, अतः मानसूनी हवा यहां ज्यादा देर नहीं टिकती और इन प्रदेशों में बहुत कम बारिश होती है। राजस्थान में हवाएं अरावली पहाड़ के समानांतर से निकल जाती हैं।