Bhagat Singh’s Call To Make India Of Dreams – भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने का आह्वान

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राजेसुल्तानपुर। भगत सिंह और उनके साथियों ने समानता और न्याय पर टिका एक समाजवादी वतन का सपना देखा था। वह एक समतामूलक समाज बनाना चाहते थे, जिसमें एक व्यक्ति के द्वारा दूसरे व्यक्ति का शोषण न हो। हमें भगत सिंह के बताए रास्ते पर चलने के लिए जाति, धर्म के आधार पर आपस में न बंटकर आपसी एकता कायम रखनी होगी। तभी भगत सिंह के सपनों का भारत बन सकेगा। यह आह्वान नौजवान भारत सभा के प्रदेश सदस्य बिंद्रेश ने किया। वह शहीदे आजम भगत सिंह के 114 वें जन्मदिवस पर शहीद स्मृति अभियान के तहत मंगलवार को आयोजित साइकिल मार्च में हिस्सेदारी कर रहे थे। यह मार्च सिंघलपट्टी से दुर्गाइतपुर, भदयां, साबितपुर, अराजी देवारा, इंदौरपुर उर्फ घिन्हापुर, बहोरिकपुर, गोपालपुर गांव तक निकाला गया।
वक्ताओं ने कहा कि आजादी के 75 वर्षों में भगत सिंह के सपनों और विचारों को दबा दिया गया। युवाओं के बीच में भगत सिंह को एक बहादुर योद्धा के रूप में तो पेश किया जाता है, लेकिन उनके विचारों से आज का शासक वर्ग उतना ही डरता है, जितना अंग्रेज भयभीत रहते थे। शहीदे आजम भगत सिंह ने एक बार कहा था कि अगर कांग्रेस के रास्ते हमें आजादी मिलेगी तो गोरे साहब तो चले जाएंगे पर भूरे साहब हम पर बाद में डंडा बरसायेंगे।
आजादी के इतने वर्षों बाद भी उनकी बात सही साबित हो रही है। देश में 35 करोड़ नौजवान बेरोजगारी के दंश से पीड़ित हैं। तमाम सरकारी विभागों को बेचा जा रहा है। कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बंद की जा रही है। जनता में फैले असंतोष को सरकारों द्वारा अंग्रेजों की ही तरह फूट डालो और राज करो की नीति के आधार पर फिर से आपस में लड़ाया जा रहा है।

राजेसुल्तानपुर। भगत सिंह और उनके साथियों ने समानता और न्याय पर टिका एक समाजवादी वतन का सपना देखा था। वह एक समतामूलक समाज बनाना चाहते थे, जिसमें एक व्यक्ति के द्वारा दूसरे व्यक्ति का शोषण न हो। हमें भगत सिंह के बताए रास्ते पर चलने के लिए जाति, धर्म के आधार पर आपस में न बंटकर आपसी एकता कायम रखनी होगी। तभी भगत सिंह के सपनों का भारत बन सकेगा। यह आह्वान नौजवान भारत सभा के प्रदेश सदस्य बिंद्रेश ने किया। वह शहीदे आजम भगत सिंह के 114 वें जन्मदिवस पर शहीद स्मृति अभियान के तहत मंगलवार को आयोजित साइकिल मार्च में हिस्सेदारी कर रहे थे। यह मार्च सिंघलपट्टी से दुर्गाइतपुर, भदयां, साबितपुर, अराजी देवारा, इंदौरपुर उर्फ घिन्हापुर, बहोरिकपुर, गोपालपुर गांव तक निकाला गया।

वक्ताओं ने कहा कि आजादी के 75 वर्षों में भगत सिंह के सपनों और विचारों को दबा दिया गया। युवाओं के बीच में भगत सिंह को एक बहादुर योद्धा के रूप में तो पेश किया जाता है, लेकिन उनके विचारों से आज का शासक वर्ग उतना ही डरता है, जितना अंग्रेज भयभीत रहते थे। शहीदे आजम भगत सिंह ने एक बार कहा था कि अगर कांग्रेस के रास्ते हमें आजादी मिलेगी तो गोरे साहब तो चले जाएंगे पर भूरे साहब हम पर बाद में डंडा बरसायेंगे।

आजादी के इतने वर्षों बाद भी उनकी बात सही साबित हो रही है। देश में 35 करोड़ नौजवान बेरोजगारी के दंश से पीड़ित हैं। तमाम सरकारी विभागों को बेचा जा रहा है। कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बंद की जा रही है। जनता में फैले असंतोष को सरकारों द्वारा अंग्रेजों की ही तरह फूट डालो और राज करो की नीति के आधार पर फिर से आपस में लड़ाया जा रहा है।